2014 के बाद धार्मिक उत्सवों के नाम पर बढ़ती अराजकता और अश्लीलता का विरोध अब जनांदोलन बना मस्जिदों पे चढ़कर पुलिस सरंक्षण में साम्प्रदायिकता और गणेशोत्सव में डीजे के खिलाफ लोग सडको पर !

महाराष्ट्र में सोलापुर के सफल अभियान के बाद अब पुणे में भी डीजे-मुक्त गणेशोत्सव के लिए एक बड़ा जनांदोलन (जन अभियान) शुरू हो चुका है। ध्वनि प्रदूषण, आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए नागरिक और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर आए है
सोलापुर में साल 2025 में हुई दो दुखद घटनाओं (तेज आवाज से एक बुजुर्ग का बहरा होना और एक युवक की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु) के बाद वहां के नागरिकों, डॉक्टरों (IMA) और वकीलों ने मिलकर ‘डीजे मुक्त सोलापुर एक्शन कमेटी’ बनाई थी। इसके बाद प्रशासन ने वहां उच्च-डेसिबल डीजे, लेजर लाइट और मॉडिफाइड साउंड सिस्टम पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया। सोलापुर में लगातार दूसरे साल भी (2026 में) गणेशोत्सव को डीजे-मुक्त रखने की तैयारी है
पुलिस ने आगामी त्योहारों के दौरान अत्यधिक कंपन पैदा करने वाले डीजे साउंड सिस्टम, बास मल्टी-स्पीकर रिग, प्लाज्मा साउंड सिस्टम और प्रेशर हॉर्न से लैस वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है और उल्लंघन करने पर उपकरण जब्त करने के आदेश दिए है
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे गणेशोत्सव के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे कर्णकर्कश डीजे की जगह पुणे के पारंपरिक ढोल-ताशा, हलगी वादन और मर्दानी खेल जैसी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को प्राथमिकता देना चाहते है



