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वीर नहीं माफीवीर था सावरकर पड़पोते सात्यकी सावरकर का कुबूलनामा,सावरकर ने पांच नहीं दस बार ‘दया की भीख’ मांगी थी।

विनायक दामोदर सावरकर के प्रपौत्र/पड़पोते सत्यकी सावरकर ने जून 2026 में पुणे की एक विशेष अदालत में यह स्वीकार किया है कि सावरकर ने जेल की सजा कम कराने के लिए ब्रिटिश सरकार को 10 दया याचिकाएं (Mercy Petitions) भेजी थीं。

पुणे की विशेष एमपी/एमएलए अदालत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई (Cross-examination) चल रही थी。 इस दौरान सत्यकी सावरकर ने जिरह के दौरान निम्नलिखित बातों को स्वीकार किया

सावरकर ने अपनी सजा को कम कराने के लिए 10 बार क्लीमेंसी (दया) याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें से पहली याचिका अंडमान की सेलुलर जेल पहुंचने के महज एक महीने के भीतर लिखी गई थी。तुलना: इस बात की भी पुष्टि की गई कि भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त जैसे क्रांतिकारियों ने अपनी आखिरी सांस तक अंग्रेजों के सामने झुकने या कोई समझौता करने से इनकार कर दिया था。

सत्यकी सावरकर का यह भी कहना था कि उस समय दया याचिकाएं देना एक सामान्य प्रक्रिया थी और कई अन्य राजनीतिक कैदियों ने भी रिहाई के लिए याचिकाएं दी थीं, जिन्हें ब्रिटिश प्रशासन ने पूरी तरह से खारिज कर दिया था。

 

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