“विदाउट फियर ऑफ फेवर”जस्टिस संजय कॉल का खुलासा पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ पर सरकार के सामने झुकने का आरोप !

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्तीस संजय किशन कौल ने अपनी आने वाली किताब ‘विदाउट फियर ऑफ फेवर’ (Without Fear of Favour) में पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ और जजों की नियुक्ति करने वाली कॉलेजियम प्रणाली को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। जस्टिस कौल के इन दावों के बाद भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सरकार के दखल को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है
• सरकार के सामने झुकने का आरोप: जस्टिस कौल ने दावा किया है कि तत्कालीन चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ कॉलेजियम की कार्यवाही के दौरान सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम (Too Deferential) रुख अपनाते थे।
• औपचारिक फैसले से पहले सहमति: उन्होंने आरोप लगाया कि एक मौके पर कॉलेजियम की औपचारिक बैठक और विचार-विमर्श से पहले ही तत्कालीन CJI ने प्रस्तावित नामों पर सरकार की “मंजूरी या राय” लेने की कोशिश की थी
• किताब के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में 6 खाली पदों को भरने के लिए 5 नामों पर सहमति बन चुकी थी। लेकिन बैठक के दिन जस्टिस चंद्रचूड़ ने आखिरी वक्त पर एक छठा नाम प्रस्तावित कर दिया, जिससे कॉलेजियम के अन्य सदस्य असहमत थे।
• कौल का वॉकआउट: अल्पसंख्यक समुदाय (Minority-faith) के एक जज उम्मीदवार की जाति/पृष्ठभूमि को लेकर सरकार द्वारा पूछे गए एक “अजीब” सवाल और दृष्टिकोण के विरोध में जस्टिस कौल कॉलेजियम की बैठक से बाहर (Walkout) चले गए थे। इसके बाद बैठक स्थगित करनी पड़ी और बाद में सरकार को उस नियुक्ति पर झुकना पड़ा
• जस्टिस कौल ने अपनी किताब में लिखा है कि राजनीतिक शाखा (सरकार) कभी भी 2015 में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) के रद्द होने के झटके से पूरी तरह उबर नहीं पाई है, जिससे राजनीतिक दबाव बना रहता है।
• हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि “सरकार उन जजों का ज्यादा सम्मान करती है जिनकी रीढ़ की हड्डी सीधी होती है” और जो मजबूती से अपनी बात रखते हैं, सरकार उनके सामने झुक जाती है
• जस्टिस कौल ने अपनी किताब में लिखा है कि राजनीतिक शाखा (सरकार) कभी भी 2015 में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) के रद्द होने के झटके से पूरी तरह उबर नहीं पाई है, जिससे राजनीतिक दबाव बना रहता है।
• हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि “सरकार उन जजों का ज्यादा सम्मान करती है जिनकी रीढ़ की हड्डी सीधी होती है” और जो मजबूती से अपनी बात रखते हैं, सरकार उनके सामने झुक जाती है


