अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नए एच-1बी वीजा पर 1.03, 265 डॉलर ( 98,62,250 रुपये) का शुल्क लगाने का प्रस्ताव ।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नए H-1B वीजा (Cap-Subject H-1B Petitions) के लिए $1,03,265 (लगभग ₹99 लाख) का भारी-भरकम अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव पेश किया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) द्वारा लाए गए इस कदम का सीधा और सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों पर पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा पाने वालों में लगभग 70-71% हिस्सेदारी अकेले भारतीयों की है।

अभी तक एक H-1B आवेदन पर कंपनियों को करीब $2,000 से $5,000 का खर्च आता था। नया नियम लागू होने पर यह खर्च सीधे $1 लाख डॉलर से ऊपर पहुंच जाएगा।
इस नए प्रस्ताव के तहत अमेरिका से पढ़ाई पूरी कर चुके विदेशी छात्रों (जो F-1 OPT से H-1B में स्टेटस चेंज करते हैं) को भी शामिल किया गया है। पहले इस श्रेणी को कुछ मामलों में राहत दी गई थी, लेकिन अब यह फीस हर ‘कैप-सब्जेक्ट’ याचिका पर अनिवार्य रूप से लागू होगी।
अमेरिकी सरकार का मानना है कि कंपनियां विदेशी पेशेवरों को अमेरिकी नागरिकों की तुलना में कम वेतन पर रखती हैं, इसलिए इस शुल्क से वे स्थानीय लोगों को नौकरी देने के लिए प्रेरित होंगी। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इससे दुनिया भर की प्रतिभाओं को आकर्षित करने की अमेरिकी कंपनियों की क्षमता प्रभावित होगी।


