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मैं संसद में रहूँ या सड़क पर अगले 30 साल तक बीजेपी के खिलाफ लड़ती रहूँगी: TMC की निष्कासित सांसद महुआ मोइत्रा ने दी भाजपा सरकार को खुली चुनौती !

कैश-फॉर-क्वेरी मामले में घिरीं टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता खत्म कर दी गई है। शुक्रवार को इस संबंध में फैसला लेते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सदन की गरिमा और मर्यादा को कायम रखने के लिए यदि कुछ कड़े फैसले लेने की जरूरत पड़ी तो लेने होंगे। विपक्ष ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है ,वहीं महुआ मोइत्रा ने इसे भाजपा के अंत की शुरुआत करार दिया है।

महुआ मोइत्रा ने संसद के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, ‘मैं 49 साल की हूं, मैं अगले 30 साल तक संसद के भीतर, संसद के बाहर, सड़क पर और गटर में आपसे (भाजपा) लड़ती रहूंगी। एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का कोई अधिकार नहीं है। यह आपके (बीजेपी) अंत की शुरुआत है।’

महुआ मोइत्रा ने आगे कहा, ‘अगर मोदी सरकार सोच रही है कि मुझे चुप कराकर वे अडानी के मुद्दे को खत्म कर देंगे, मैं आपको यह बता दूं कि संसद ने पूरे भारत को केवल यह दिखाया है कि आपने यह जो जल्दबाजी और उचित प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है, यह दर्शाता है कि अडानी आपके लिए कितना जरूरी है। आप एक अकेली महिला सांसद को झुकाने के लिए और उसे रोकने के लिए किस हद तक परेशान कर सकते हैं।’

मोइत्रा ने कहा, ‘एथिक्स कमिटी के निष्कर्ष पूरी तरह से दो व्यक्तियों की लिखित गवाही पर आधारित हैं, जिनके कथन असल में एक-दूसरे के विरोधाभासी हैं। मेरे खिलाफ पूरा मामला लॉगिन क्रिडेंशियल शेयर करने पर आधारित है, लेकिन इस पहलू के लिए कोई नियम तय नहीं है। सांसद आम जनता के सवालों को संसद तक पहुंचाने में ब्रिज की भूमिका निभाते हैं। मुझे बिना सबूत के सजा दिया गया।’

टीएमसी नेता ने कहा, ‘कैश या गिफ्ट का किसी के पास कोई सबूत नहीं है। एथिक्स कमिटी ने मुद्दे की जड़ तक पहुंचे बिना मुझे दोषी ठहराने का फैसला किया। दो शिकायतकर्ताओं में से एक मेरे एक्स पार्टनर भी हैं, जो गलत इरादे से एथिक्स कमिटी के सामने आम नागरिक के रूप में पेश हुए। लोकसभा की एथिक्स कमेटी ने मुझे झुकाने के लिए बनाई गई अपनी रिपोर्ट में हर नियम तोड़ा है।’

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