महिला आरक्षण विधेयक एक चुनावी ‘जुमला’, महिलाओं-लड़कियों की उम्मीदों के साथ बड़ा धोखा,मूल रूप से यह विधेयक कुछ और नहीं बल्कि इवेंट मैनेजमेंट है-कांग्रेस
महिला आरक्षण विधेयक एक चुनावी 'जुमला', महिलाओं-लड़कियों की उम्मीदों के साथ बड़ा धोखा,

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को पेश कर दिया गया है। इसे कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने पेश किया। इसके तुरंत बाद कांग्रेस ने मंगलवार को सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा, ”यह विधेयक सबसे बड़े चुनावी ‘जुमलों’ में से एक है। करोड़ों भारतीय महिलाओं और लड़कियों की उम्मीदों के साथ बहुत बड़ा धोखा है।”

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, ”चुनावी जुमलों के इस मौसम में, यह उन सभी जुमलों में सबसे बड़ा है। करोड़ों भारतीय महिलाओं और लड़कियों की उम्मीदों के साथ बहुत बड़ा धोखा।”
चुनावी जुमलों के इस मौसम में, यह सबसे बड़ा जुमला है! यह देश की करोड़ों महिलाओं और लड़कियों की उम्मीदों के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात है।
हमने पहले भी बताया है कि मोदी सरकार ने अभी तक 2021 में होने वाली दशकीय जनगणना नहीं की है। भारत G20 का एकमात्र देश है जो जनगणना कराने में विफल… https://t.co/8iuBVXM49S
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 19, 2023
राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, ”जैसा कि हमने पहले बताया था, मोदी सरकार ने अभी तक 2021 की दशकीय जनगणना नहीं की है, जिससे भारत जी20 में एकमात्र देश बन गया है जो जनगणना करने में विफल रहा है।
अब इसमें कहा गया है कि महिला आरक्षण विधेयक के अधिनियम बनने के बाद आयोजित होने वाली पहली दशकीय जनगणना के बाद ही महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होगा। यह जनगणना कब होगी?”
जयराम रमेश ने कहा कि विधेयक में यह भी कहा गया है कि आरक्षण अगली जनगणना के प्रकाशन और उसके बाद परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही प्रभावी होगा। क्या 2024 चुनाव से पहले होगी जनगणना और परिसीमन? मूल रूप से यह विधेयक अपने कार्यान्वयन की तारीख के बहुत अस्पष्ट वादे के साथ आज सुर्खियों में है। यह कुछ और नहीं बल्कि ईवीएम-इवेंट मैनेजमेंट है।



