गुजरात

चुनाव आयोग के खिलाफ देश में बढ़ता असंतोष, अमित शाह चुनाव प्रचार नहीं कर रहे बल्कि आदर्श आचार संहिता की धज्जियां उड़ा रहे है,शाह के विवादित बयान के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज़ !

अमित शाह चुनाव प्रचार नहीं कर रहे बल्कि आदर्श आचार संहिता की धज्जियां उड़ा रहे है,शाह के विवादित बयान के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज़ !

देश का चुनाव आयोग इन दिनों वैसे ही सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर है आयोग के एक तरफ़ा व् बेहद लचर रवैय्ये को लेकर कोर्ट पहले ही अपने नाराज़गी ज़ाहिर कर चूका है !

वंही गुजरात विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच 2002 दंगों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर एक बार फिर विवाद चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। देश के कुछ प्रबुद्ध नागरिकों ने शाह के बयान को उकसाने वाला करार दिया है। उनके इस बयान को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया गया है। पूर्व नौकरशाहों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग से गुजरात में एक चुनावी रैली के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान पर कार्रवाई की मांग की है।

प्रबुद्ध नागरिकों में शामिल भारत सरकार के पूर्व सचिव ईएएस सरमा और जगदीप छोकर ने 26 नवंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, चुनाव आयुक्त एसी पांडे और चुनाव आयुक्त गोयल को लिखे एक पत्र में सबसे पहले गुजरात में खेड़ा जिले के महुधा में एक रैली के दौरान शाह के बेहद आपत्तिजनक बयान का मुद्दा उठाया है। अपने पत्र में इन लोगों ने चुनाव आयोग से इस तरह के विभाजनकारी संबोधनों की अनुमति नहीं देने का आग्रह करते हुए शाह के खिलाफ जांच और आवश्यक सजा की भी मांग की है।

प्रबुद्ध नागरिकों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि बयान भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए का उल्लंघन है जो धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने से संबंधित है। इस पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 भी लागू होती है, जो 153ए समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं में दोषसिद्धि होने पर अयोग्यता प्रदान करती है।

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