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किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के आमरण अनशन के 40वें दिन खनौरी बॉर्डर पर महापंचायत में किसानों के सैलाब ने रचा इतिहास,

पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर किसान महापंचायत में उमड़े किसानों के सैलाब ने किसान आंदोलन के इतिहास में एक नई तारीख लिखी है। 40 दिन से अन्न का एक दाना न ग्रहण करने वाले किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के एक आह्वान पर मानो पूरा पंजाब उमड़ आया। खनौरी बॉर्डर की तरफ जा रही हर सड़क पर किसानों का रेला इस बात की तस्दीक कर रहा था कि केंद्र सरकार के लिए अभी भी जाग जाने का वक्त है। केंद्र की सरकार किसी अनहोनी को दावत दे रही है। हर किसान की जुबान पर एक ही सवाल था कि हम कोई दिल्ली की सल्तनत तो नहीं मांग रहे हैं। अपनी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य ही तो मांग रहे हैं। फिर मोदी सरकार को हमसे बात करने में दिक्कत क्या है।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के आमरण अनशन के 40वें दिन खनौरी बॉर्डर पर एक नया इतिहास रचा गया। खनौरी बॉर्डर से पहले 7 किलोमीटर तक हाईवे जाम था। हालात ऐसे थे कि लोगों ने मुख्य पंडाल तक पहुंचने के लिए अपने वाहन वहीं हाईवे पर छोड़ दिए। बावजूद इसके बड़ी तादाद में लोग वहां तक नहीं पहुंच पाए।


 

जगजीत सिंह डल्लेवाल जिन्हें सुनने के लिए किसान बेताब थे। 40 दिन से आमरण अनशन पर बैठे महज हडि्डयों का ढांचा बचे डल्लेवाल को मंच पर स्ट्रेचर से लाया गया। राम-राम कहकर डल्लेवाल ने अपना संबोधन शुरू किया। बेहद कमजोर हो जाने के बावजूद भी उनकी आवाज हौंसले और जज्बे से भरपूर थी। जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया हजारों के सैलाब के बावजूद एकदम सन्नाटा था। डल्लेवाल ने कहा कि जो मैं लड़ाई लड़ रहा हूं, यह लड़ाई मैं नहीं लड़ रहा। यह तो सिर्फ एक शरीर दिख रहा है लड़ाई लड़ते हुए। यह ऊपर वाले की मर्जी से हो रहा है। पुलिस ने मुझे यहां से उठाने का प्रयास किया। जब लोगों को पता चला तो पंजाब-हरियाणा से सैकड़ों नौजवान हमारे पास पहुंचे और मोर्चा संभाला। पुलिस हमें उठाने के लिए रात में ही आती है। आज जो लोग मोर्चे पर पहुंचे हैं, यह सिर्फ ऊपर वाले की कृपा है। सरकार जितना मर्जी जोर लगा ले, हम मोर्चा जीत कर ही रहेंगे।

डल्लेवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मेरी सेहत को लेकर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि डल्लेवाल की जान बहुत कीमती है। मैं इस पर आभार व्यक्त करता हूं, लेकिन जिन किसानों ने आत्महत्या की, उनका कसूर क्या था? मैंने कहा कि जो 7 लाख किसान मरे हैं, उनकी जान भी कीमती थी। किसानों की आत्महत्या रुकनी चाहिए। बीच में गला सूखने पर पानी मांगा। ज्यादा बोलने पर ब्लड प्रेसर बढ़ने की डाक्टरों की हिदायत पर कहा हमें कुछ नहीं होगा। डल्लेवाल ने कहा कि जब हम दिल्ली से लौटे थे, दूसरे राज्यों के नेताओं ने कहा था कि पंजाब 3 कानून वापस करवाकर लौट गया। तब हमने जवाब दिया था कि हमने किसी को धोखा नहीं दिया। मेरा सभी संगठनों से हाथ जोड़कर निवेदन है कि आप सभी एक साथ आकर सरकार के लिए चिंता पैदा कर दो। इससे सरकार को पता चल जाएगा कि यह आंदोलन सिर्फ पंजाब का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। डल्लेवाल ने लोगों से अपील की कि हर गांव से कम से कम एक-एक ट्रैक्टर ट्रॉली जरूर आंदोलन में पहुंचे। इससे मोर्चे को ताकत मिलेगी।

 

 

 

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